देशभर में सर्दी का कहर, दिल के मरीज रखें खास ख्याल

यों रहता है खतरा?
हार्ट अटैक के लिए किसी एक मौसम में खतरा नहीं बताया जा सकता यह किसी भी मौसम में हो सकता है। हालांकि सर्दियों में इसकी संभावना सबसे ज्यादा होती है। सर्दियों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है, जिन्हें दिल की बीमारी होती है। बैरोमेट्रिक दबाव, नमी, हवा और ठंड जैसे कई कारण हैं, जिसके कारण हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
ऑक्सीजन का प्रवाह
ठंडे बदलावों के चलते दिल की धमनियां सिकुड़ जाती हैं। इन दिनों में ठंड से नर्वस सिस्टम की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिससे रक्त गाढ़ा होने लगता है। ऐसे में दिल में खून और ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है। इसी वजह से हाइपरटेंशन और दिल के मरीजों में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
ठंडे बदलावों के चलते दिल की धमनियां सिकुड़ जाती हैं। इन दिनों में ठंड से नर्वस सिस्टम की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिससे रक्त गाढ़ा होने लगता है। ऐसे में दिल में खून और ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है। इसी वजह से हाइपरटेंशन और दिल के मरीजों में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
रिचर्स
ठंडे मौसम में ब्लड प्लेट्लेट्स ज्यादा सक्रिय और चिपचिपे होते हैं, इसलिए रक्त के थक्के जमने की आशंका भी बढ़ जाती है। इससे हार्ट अटैक होने की संभावना ज्यादा होती है। एक रिसर्च के अनुसार सबसे ज्यादा हार्ट अटैक दिसंबर में हुए जबकि सबसे कम जुलाई में होना पाया गया है।
ठंडे मौसम में ब्लड प्लेट्लेट्स ज्यादा सक्रिय और चिपचिपे होते हैं, इसलिए रक्त के थक्के जमने की आशंका भी बढ़ जाती है। इससे हार्ट अटैक होने की संभावना ज्यादा होती है। एक रिसर्च के अनुसार सबसे ज्यादा हार्ट अटैक दिसंबर में हुए जबकि सबसे कम जुलाई में होना पाया गया है।
विटामिन डी की कमी
सर्दियों में दिन छोटे होने के कारण लोग अधिकांश समय घर में बिताते हैं। इन दिनों में धूप भी कम निकलती है, जिससे शरीर में विटामिन डी की कमी भी हो जाती है। जबकि चिकित्सकों के अनुसार सर्दियों में उचित मात्रा में धूप सेंकना बेहद जरूरी है। धूप न मिलने से होने वाली विटामिन डी की कमी के चलते सीने का दर्द और दिल के दौरे का जोखिम बढ़ जाता है। इससे कंजस्टिव हार्ट फेल्योर, इस्केमिक हार्ट डिसीज, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
सर्दियों में दिन छोटे होने के कारण लोग अधिकांश समय घर में बिताते हैं। इन दिनों में धूप भी कम निकलती है, जिससे शरीर में विटामिन डी की कमी भी हो जाती है। जबकि चिकित्सकों के अनुसार सर्दियों में उचित मात्रा में धूप सेंकना बेहद जरूरी है। धूप न मिलने से होने वाली विटामिन डी की कमी के चलते सीने का दर्द और दिल के दौरे का जोखिम बढ़ जाता है। इससे कंजस्टिव हार्ट फेल्योर, इस्केमिक हार्ट डिसीज, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
खतरनाक
हार्ट अटैक और हाई बीपी की समस्या इन दिनों में सबसे अधिक रहती है। इन दिनों में हाई बीपी यानी हाईपरटेंशन के लक्षण भी सामने आते हैं। ऐसे में जब स्थिति गंभीर लगे तो चिकित्सक की सलाह तुरंत लेना चाहिए। इन दिनों में अवसाद से पीड़ित लोग ज्यादा चीनी, ट्रांसफैट और सोडियम व ज्यादा कैलोरी वाला आरामदायक भोजन करते हैं, जो कि मोटापे, दिल के रोगों और हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से खतरनाक है।
हार्ट अटैक और हाई बीपी की समस्या इन दिनों में सबसे अधिक रहती है। इन दिनों में हाई बीपी यानी हाईपरटेंशन के लक्षण भी सामने आते हैं। ऐसे में जब स्थिति गंभीर लगे तो चिकित्सक की सलाह तुरंत लेना चाहिए। इन दिनों में अवसाद से पीड़ित लोग ज्यादा चीनी, ट्रांसफैट और सोडियम व ज्यादा कैलोरी वाला आरामदायक भोजन करते हैं, जो कि मोटापे, दिल के रोगों और हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से खतरनाक है।
ऐसे रखें ख्याल
सर्दी के मौसम में अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं
इन दिनों में कम थकान वाला व्यायाम करें
खाना वो खाएं जो दिल के स्वास्थ्य के लिए अच्छा हो
इन दिनों में सुबह जल्दी उठें वहीं देर रात तक बाहर रहने से बचें
दिल के मरीजों को इन दिनों में तनाव मुक्त रहना चाहिए
बीपी, डायबिटीज, कॉलेस्ट्रोल न हो, इसका खास ख्याल रखें
Source: Bhaskarhindi.com
सर्दी के मौसम में अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं
इन दिनों में कम थकान वाला व्यायाम करें
खाना वो खाएं जो दिल के स्वास्थ्य के लिए अच्छा हो
इन दिनों में सुबह जल्दी उठें वहीं देर रात तक बाहर रहने से बचें
दिल के मरीजों को इन दिनों में तनाव मुक्त रहना चाहिए
बीपी, डायबिटीज, कॉलेस्ट्रोल न हो, इसका खास ख्याल रखें
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