RBI बोर्ड में संघ की एंट्री, एस गुरुमूर्ति और सतीश मराठे बने निदेशक

NEWS HIGHLIGHTS
- संघ की RBI में एंट्री, एस गुरुमूर्ति और सतीश मराठे बने अंशकालिक निदेशक।
- चार साल के लिए की गई है नियुक्ति।
- पीएम मोदी के करीबी हैं स्वामीनाथन गुरुमूर्ति।
- पेशे से CA और संघ से जुड़े हुए हैं गुरुमूर्ति।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मोदी सरकार के कार्यकाल में देशभर में संघ से जुड़े लोगों को काफी तवज्जो दी जा रही है। अब आरबीआई में भी संघ की एंट्री हो गई है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को सतीश काशीनाथ मराठे और स्वामीनाथन गुरुमूर्ति को आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड का अंशकालिक निदेशक नियुक्त किया है। यह नियुक्ति चार साल के लिए हुई है।

1/2स्वामीनाथन गुरुमूर्ति
एस गुरुमूर्ति और सतीश मराठे दोनों ही संघ से जुड़े हुए हैं। गौरतलब है कि आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के जाने के बाद से ही कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि केंद्र सरकार बैंक के स्वतंत्र फैसले लेने की क्षमता को प्रभावित कर रही है। मंगलवार की रात स्वदेशी जागरण मंच के सह-संयोजक गुरुमूर्ति और मराठे की आरबीआई में नियुक्ति का फैसला सामने आया है।
आरबीआई बोर्ड में निदेशकों की संख्या हुई 10
इन दो नियुक्तियों के बाद आरबीआई बोर्ड में 10 निदेशक हो गए हैं। इनकी नियुक्ति का प्रस्ताव केंद्रीय वित्त मंत्रालय की वित्तीय सेवा विभाग की तरफ से भेजा गया था। एस गुरुमूर्ति और सतीश काशीनाथ मराठे को आरबीआई का नॉन ऑफिशियल और पार्ट टाइम डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। यह आरबीआई एक्ट 1934 के अनुच्छेद 8 (1) (C) के तहत किया गया है।
नोटबंदी के फैसले के पीछे गुरुमूर्ति की योजना
नवंबर 2016 में पीएम मोदी ने नोटबंदी का फैसला किया था इसके पीछे गुरुमूर्ति का ही दिमाग बताया गया था। निदेशक बनाए जाने के बाद गुरुमूर्ति ने ट्वीट किया है, 'मुझे पहली बार यह पद मिला है। मैंने कभी निजी क्षेत्र या पीएसयू में निदेशक के पद को स्वीकार नहीं किया। कभी पीएसयू या निजी कंपनी में कोई ऑडिट भी नहीं किया। मैं स्वतंत्र होकर बोलना चाहता था, लेकिन जब दबाव बढ़ा कि मुझे लोगों के हित में काम करना चाहिए तो मैंने इसे स्वीकार किया।'
Story of my appointment as director RBI. This is the first directorship ever. Never accepted any private or PSU directorship. Not even audit of PSUs or Pvt cos. Wanted to be free to speak. But when pressure built up I am needed to do something in public interest I had to accept.
— S Gurumurthy (@sgurumurthy) August 8, 2018
जानकारी के मुताबिक, एस गुरुमूर्ति ने चार्टेड अकाउंटेंट की ट्रेनिंग ली है, इसके साथ ही वो पत्रकार और लेखक भी रह चुके हैं। उन्होंने हिन्दुत्व और बैंकिंग फाइनेंस पर कई लेख लिखा है। वो पब्लिशिंग ग्रुप से जुड़े रहे हैं। गुरुमूर्ति रामनाथ गोयनका ग्रुप के अखबार से भी जुड़े रहे हैं। गुरुमूर्ति तमिलनाडु की राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं।
गुरुमूर्ति की राजनीतिक पकड़ भी मजबूत
गुरुमूर्ति के आरबीआई बोर्ड में डायरेक्टर के रूप में नियुक्ति के पीछे की वजह उनकी राजनीतिक पकड़ और पहुंच है। वो CA के अलावा अर्थशास्त्री, राजनीतिक और आर्थिक मामलों के टिप्पणीकार भी हैं। संघ से जुड़े होने के साथ ही बीजेपी और पीएम मोदी के बड़े समर्थक के रूप में उनकी पहचान है। अपने ट्विटर अकाउंट पर अक्सर रिजर्व बैंक से जुड़ी नीतियों के बारे में लिखते रहते हैं। गुरुमूर्ति एक तमिल मैगजीन के एडिटर भी हैं।

2/2सतीश काशीनाथ मराठे
वहीं सतीश काशीनाथ मराठे को भी बैंकिंग क्षेत्र में लंबा अनुभव है। वो कॉपरेटिव के मदद के लिए काम करने वाले NGO 'सहकार भारती' के संस्थापक हैं। बैंक ऑफ इंडिया के साथ काम शुरू करने के बाद वो द यूनाइटेड वेस्टर्न बैंक के अध्यक्ष बने। 1991 में उन्हें जनकल्याण सहकारी बैंक लिमिटेड के चीफ एक्जक्यूटिव ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने इंडिन बैंक एसोसिएशन के मानद सचिव और निजी क्षेत्र बैंक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है। मराठे युवा अवस्था में RSS के छात्र यूनिट ABVP से जुड़े थे। उन्होंने चार साल कर कोषाध्यक्ष के रूप में भी काम किया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत कुछ करने की जरूरत है
आरबीआई बोर्ड में नियुक्ति के बाद जब मराठे से पूछा गया कि वो रिजर्व बैंक के सेंट्रल बोर्ड में क्या करेंगे। इस पर उन्होंने कहा मेरे पास सहकारी क्षेत्र की मजबूत पृष्ठभूमि है। 40 से अधिक वर्षों तक मैंने इसमें काम किया है। हमें कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत कुछ करने की जरूरत है।
दो भागों में विभाजित है RBI
दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक दो पार्ट में बांटा गया है। एक ऑफिशियल और दूसरा नॉन ऑफिशियल। ऑफिशियल डायरेक्टर में गर्वनर होते हैं, साथ ही अधिकतम चार डिप्टी गर्वनर होते हैं। वहीं नॉन ऑफिशियल में दस डायरेक्टर्स को सरकार नियुक्त करती है।
Source: Bhaskarhindi.com
दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक दो पार्ट में बांटा गया है। एक ऑफिशियल और दूसरा नॉन ऑफिशियल। ऑफिशियल डायरेक्टर में गर्वनर होते हैं, साथ ही अधिकतम चार डिप्टी गर्वनर होते हैं। वहीं नॉन ऑफिशियल में दस डायरेक्टर्स को सरकार नियुक्त करती है।
कोई टिप्पणी नहीं: