अयोध्या विवाद मामला: मध्यस्थता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी

NEWS HIGHLIGHTS
- अयोध्या विवाद मामले में मध्यस्थता के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज।
- अयोध्या मामले में मध्यस्थता होगी या नहीं, इस पर SC सुनाएगा फैसला।
- पिछली सुनवाई में बातचीत से मामला सुलझाने की बात कही गई थी।
अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में मध्यस्थता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। इस दौरान कोर्ट यह तय करेगा कि अयोध्या भूमि विवाद मामले का मध्यस्थता के जरिए समाधान किया जा सकता है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट अयोध्या भूमि विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजे जाने पर अपना फैसला दे सकता है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान कहा था, अगर एक फीसदी भी बातचीत की गुंजाइश है तो उसके लिए प्रयास किया जाना चाहिए।
Hearing begins in Supreme Court on Ayodhya Ram Janmabhoomi-Babri Masjid land dispute case. Court says to decide on whether the case may be sent for court-monitored mediation to save time. pic.twitter.com/g8fVJrR77v— ANI (@ANI) March 6, 2019
पांच जजों की बेंच ने दिया था बातचीत का सुझाव
पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने सुझाव दिया था कि, दोनों पक्षकार बातचीत का रास्ता निकालने पर विचार करें। अगर बातचीत की थोड़ी बहुत गुंजाइश भी है, तो उसका प्रयास होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, दोनों पक्ष इस मामले में कोर्ट को अपने मत से अवगत कराएं। जस्टिस बोबड़े ने अपनी टिप्पणी में कहा था 'यह कोई निजी संपत्ति को लेकर विवाद नहीं है, बल्कि पूजा-अर्चना के अधिकार से जुड़ा मामला है। अगर समझौते के जरिए एक प्रतिशत भी इस मामले के सुलझने की गुंजाइश हो तो इसकी कोशिश होनी चाहिए।
पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने सुझाव दिया था कि, दोनों पक्षकार बातचीत का रास्ता निकालने पर विचार करें। अगर बातचीत की थोड़ी बहुत गुंजाइश भी है, तो उसका प्रयास होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, दोनों पक्ष इस मामले में कोर्ट को अपने मत से अवगत कराएं। जस्टिस बोबड़े ने अपनी टिप्पणी में कहा था 'यह कोई निजी संपत्ति को लेकर विवाद नहीं है, बल्कि पूजा-अर्चना के अधिकार से जुड़ा मामला है। अगर समझौते के जरिए एक प्रतिशत भी इस मामले के सुलझने की गुंजाइश हो तो इसकी कोशिश होनी चाहिए।
मध्यस्थ की भी नियुक्ति कर सकता है कोर्ट
कोर्ट अयोध्या विवाद का समाधान बातचीत के जरिए निकालने के लिए मध्यस्थ की भी नियुक्ति कर सकता है। कोर्ट ने पिछले हफ्ते ही इसके संकेत दिए थे। उस दौरान कोर्ट ने कहा था, मुख्य मामले की अगली सुनवाई में करीब 8 हफ्ते का समय है। ऐसे में बेहतर होगा कि इस समय का इस्तेमाल सभी पक्ष बातचीत के जरिए समाधान तक पहुंचने के लिए करें।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर हैं याचिकाएं
गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 2010 में सुनाए गए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कुल 14 याचिकाएं दायर की गई हैं। हाई कोर्ट ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन हिस्सों में सुन्नी वक्फ बोर्ड, राम लला और निर्मोही अखाड़े के बीच बांटने का आदेश दिया था, लेकिन अभी तक इस मामले का निपटारा नहीं हो पाया है।
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