LIVE: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू, पुरी और अहमदाबाद में उमड़ा जनसैलाब

NEWS HIGHLIGHTS
- अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 141 वीं रथयात्रा रवाना।
- मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने झाडू निकालकर रथ को खींच कर रथयात्रा की शुरूआत की।
- मंगला आरती के लिए अमहादाबाद पहुंचे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह।
डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। उड़ीसा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू हुई। भगवान जगन्नाथ, बलभ्रद और देवी सुभद्रा को गर्भगृह से बाहर लाकर रथ में बनाए गए सिंहासन पर विराजमान किया गया है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा नगर भ्रमण के लिए रवाना हो चुकी है। इससे पहले भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई और विशेष श्रृंगार किया गया। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पुरी और गुजरात के अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 141 वीं भव्य रथयात्रा निकाली जा रही है। अहमदाबाद में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने सोने की झाडू से रथ के सामने सफाई की उसके बाद रथ को खींच कर यात्रा को रवाना किया।
लाखों श्रद्धालुओं के बीच बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रथयात्रा से पहले अहमदाबाद में मंगला आरती में शामिल हुए। ओडिशा के पुरी में भी रथयात्रा शुरू होने का इंतजार है। भगवान जगन्नाथ का विशेष श्रृंगार किया जा रहा है। भगवान जगन्नाथ का रथ पीले और लाल रंग के कपड़ो से बना है, जिसमें 16 पहिए लगे हैं। सुभद्रा जी का रथ काले और लाल रंग के कपड़ो का बना है। जिसमें 12 पहिए लगे है। बलभद्र भगवान का रथ हरे और लाल रंग से सजाया गया है, इसमें 14 पहिए लगाए गए है। अहमदाबाद में रथयात्रा भगवान जगन्नाथ के मुख्य मंदिर से सरसपुर के रणछोड़दास मंदिर तक जाएगी। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ यहां करीब दो घंटे रुकेंगे। सरसपुर के रणछोड़दास मंदिर को भगवान जगन्नाथ का ननिहाल कहा जाता है। अहमदाबाद में मंत्रोच्चार के साथ मंगला आरती के पहले भगवान जगन्नाथ का भव्य स्नान और अभिषेक किया गया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो जारी भगवान जगन्नाथ की यात्रा को लेकर सभी देशवासियों को शुभकमानाएं दी
मंगला आरती में शामिल हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह
सुरक्षा व्यवस्था की बीच रथयात्रा
अहमदाबाद में रथयात्रा के 15 किमी लम्बे रूट पर पहली बार इजराइली हीलियम बैलून लगाए गए हैं। हाईडेफिनेशन कैमेरों की मदद से यात्रा पर निगरानी रखी जा रही है। अहमदाबाद की रथयात्रा में सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम हैं। गुजरात पुलिस के 14 हजार से ज्यादा जवान, स्टेट रिजर्व पुलिस की 22 कंपनियां और अर्धसैनिक बलों की 25 कंपनियां तैनात हैं। भगवान की इस रथयात्रा में करीबन 2500 साधुसंत शामिल है। इस रथयात्रा की सुरक्षा के लिए 1.5 करोड़ रुपये का बीमा भी लिया गया है। रथयात्रा के दौरान अगर कोई बड़ी जानहानि होती हे तो उसके लिए ये बीमा सुरक्षा रहेगा।
अहमदाबाद में रथयात्रा के 15 किमी लम्बे रूट पर पहली बार इजराइली हीलियम बैलून लगाए गए हैं। हाईडेफिनेशन कैमेरों की मदद से यात्रा पर निगरानी रखी जा रही है। अहमदाबाद की रथयात्रा में सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम हैं। गुजरात पुलिस के 14 हजार से ज्यादा जवान, स्टेट रिजर्व पुलिस की 22 कंपनियां और अर्धसैनिक बलों की 25 कंपनियां तैनात हैं। भगवान की इस रथयात्रा में करीबन 2500 साधुसंत शामिल है। इस रथयात्रा की सुरक्षा के लिए 1.5 करोड़ रुपये का बीमा भी लिया गया है। रथयात्रा के दौरान अगर कोई बड़ी जानहानि होती हे तो उसके लिए ये बीमा सुरक्षा रहेगा।
रथयात्रा का इतिहास
उड़ीसा के पूरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर दुनिया में प्रसिद् है। सनातन धर्म में इसे चार धामों में से एक कहा गया। जगन्नाथ पूरी में भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण का मंदिर है। यहां हर साल भगवान कृष्ण उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा को रथों में बैठाकर गुंडीचा मंदिर ले जाया जाता है। तीनों रथों को भव्य रूप से सजाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा अपने मायके आती है, और अपने भाइयों से नगर भ्रमण करने की इच्छा व्यक्त करती है, तब कृष्ण और बलराम सुभद्रा के साथ रथ में सवार होकर नगर घुमने जाते है, इसके बाद से रथ यात्रा का पर्व शुरू हुआ है। इसके अलावा कहते है, कि गुंडीचा मंदिर में स्थित देवी कृष्ण की मासी है, जो तीनों को अपने घर आने का निमंत्रण देती है। श्रीकृष्ण, बलराम सुभद्रा के साथ अपनी मासी के घर 10 दिन के लिए रहने जाते है।
उड़ीसा के पूरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर दुनिया में प्रसिद् है। सनातन धर्म में इसे चार धामों में से एक कहा गया। जगन्नाथ पूरी में भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण का मंदिर है। यहां हर साल भगवान कृष्ण उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा को रथों में बैठाकर गुंडीचा मंदिर ले जाया जाता है। तीनों रथों को भव्य रूप से सजाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा अपने मायके आती है, और अपने भाइयों से नगर भ्रमण करने की इच्छा व्यक्त करती है, तब कृष्ण और बलराम सुभद्रा के साथ रथ में सवार होकर नगर घुमने जाते है, इसके बाद से रथ यात्रा का पर्व शुरू हुआ है। इसके अलावा कहते है, कि गुंडीचा मंदिर में स्थित देवी कृष्ण की मासी है, जो तीनों को अपने घर आने का निमंत्रण देती है। श्रीकृष्ण, बलराम सुभद्रा के साथ अपनी मासी के घर 10 दिन के लिए रहने जाते है।

भगवान कृष्ण का रूप है जगन्नाथ
उड़ीसा के पुरी के बाद भगवानविष्णु के अवतार भगवान कृष्ण को ही जगन्नाथ यानी जगत के पालनहार कहा जाता है। गुजरात में भारी तादाद में भगवान कृष्ण के अनुयायी हैं। गुजरात के द्वारका में भगवान कृष्ण की राजधानी की मान्यता है।
उड़ीसा के पुरी के बाद भगवानविष्णु के अवतार भगवान कृष्ण को ही जगन्नाथ यानी जगत के पालनहार कहा जाता है। गुजरात में भारी तादाद में भगवान कृष्ण के अनुयायी हैं। गुजरात के द्वारका में भगवान कृष्ण की राजधानी की मान्यता है।

यात्रा में आकर्षण का केन्द्र
भगवान जगन्नाथ की यात्रा के लिए तीनों रथों को बेहद खूबसूरत ढंग से तैयार किया गया है। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने आने वाले लोगों को 30 हजार किलो भीगे हुए मूंग, 500 किलो जामुन, 300 किलो आम और 400 किलो ककड़ी दी जाएगी। रथयात्रा की शुरुआत में सबसे आगे 18 गजराज, 101 ट्रक, 30 अखाड़े जो कि अलग-अलग करतब दिखाएंगे। 18 भजन मंडली और तीन बैंड बाजे के साथ निकलेगी। रथयात्रा का समापन शाम के वक्त करीबन 7 बजे रथ की मंदिर में वापसी के साथ होगा।
भगवान जगन्नाथ की यात्रा के लिए तीनों रथों को बेहद खूबसूरत ढंग से तैयार किया गया है। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने आने वाले लोगों को 30 हजार किलो भीगे हुए मूंग, 500 किलो जामुन, 300 किलो आम और 400 किलो ककड़ी दी जाएगी। रथयात्रा की शुरुआत में सबसे आगे 18 गजराज, 101 ट्रक, 30 अखाड़े जो कि अलग-अलग करतब दिखाएंगे। 18 भजन मंडली और तीन बैंड बाजे के साथ निकलेगी। रथयात्रा का समापन शाम के वक्त करीबन 7 बजे रथ की मंदिर में वापसी के साथ होगा।

फ्रांस की राजधानी पेरिस में भगवान जगन्नाथ यात्रा की कुछ तस्वीरें
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