इंदौर: संत भय्यूजी महाराज ने खुद को मारी गोली, हॉस्पिटल में निधन

NEWS HIGHLIGHTS
- संत भय्यूजी महाराज ने खुद को मारी गोली।
- इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में निधन।
डिजिटल डेस्क, इंदौर। राष्ट्र संत के रूप में प्रसिद्ध भय्यूजी महाराज ने गोली मारकर खुदकुशी कर ली है। जानकारी के मुताबिक इंदौर के सिल्वर स्प्रिंग स्थित निवास पर उन्होंने खुद को गोली मारी थी। इसके बाद उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उन्हें बचाने की कोशिश नाकाम रही। भय्यूजी महाराज की मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बड़ी फॉलोइंग है।
खुदकुशी की वजह का खुलासा नहीं
भय्यूजी महाराज संत होने के साथ ही सूर्योदय संस्था के जरिए सामाजिक कार्य करते थे। उन्होंने मौत की राह क्यों चुनी, फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। हालांकि माना जा रहा है कि पारिवारिक तनाव की वजह से उन्होंने मौत को गले लगा लिया।
पिछले वर्ष ही किया था दूसरा विवाह
पहली पत्नी के निधन के बाद भय्यूजी महाराज ने पिछले साल अप्रैल में ग्वालियर की डॉ. आयुषी से विवाह किया था। उनका ये कदम हैरत में डालने वाला था, लेकिन मां और बेटी की देखभाल के लिए उन्होंने ये कदम उठाया था।
मध्य प्रदेश सरकार ने दिया था राज्य मंत्री का दर्जा
हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने भय्यूजी महाराज को राज्य मंत्री का दर्जा भी दिया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया था।
29 अप्रैल 1968 को शुजालपुर में हुआ था जन्म
भय्यूजी महाराज का जन्म 29 अप्रैल 1968 को मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर में जमीदार परिवार में हुआ था। वो सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। RSS और BJP के आला नेताओं के साथ उनकी नजदीकियां रही हैं। उन्हें संकटमोचक के तौर पर देखा जाता था और कई बार उन्होंने इसे साबित भी किया। गुरु दक्षिणा के रूप में वह लोगों से एक पौधा लगाने के लिए कहते थे। ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर भी वह काफी चिंतित थे।
भय्यूजी महाराज का जन्म 29 अप्रैल 1968 को मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर में जमीदार परिवार में हुआ था। वो सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। RSS और BJP के आला नेताओं के साथ उनकी नजदीकियां रही हैं। उन्हें संकटमोचक के तौर पर देखा जाता था और कई बार उन्होंने इसे साबित भी किया। गुरु दक्षिणा के रूप में वह लोगों से एक पौधा लगाने के लिए कहते थे। ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर भी वह काफी चिंतित थे।
मॉडलिंग से शुरू किया था करियर
भैय्यूजी महाराज महाराष्ट्रियन समाज के बीच काफी लोकप्रिय थे। भय्यू महाराज का असली नाम उदयसिंह देशमुख है। उन्होंने मॉडलिंग से करियर की शुरुआत की थी। कभी कपड़ों के एक ब्रांड के ऐड के लिए मॉडलिंग कर चुके हैं। सदगुरु दत्त धार्मिक ट्रस्ट उनके ही देखरेख में चलता है। उनका मुख्य आश्रम इंदौर के बापट चौराहे पर स्थित है।
अन्ना हजारे के अनशन के दौरान चर्चा में आए थे भैय्यूजी
इससे पहले वो चर्चा में तब आए जब अन्ना हजारे के अनशन को खत्म करवाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने अपना दूत बनाकर भेजा था। बाद में अन्ना हजारे ने उनके हाथ से जूस पीकर अनशन तोड़ा था। पीएम बनने के पहले गुजरात के सीएम के रूप में नरेंद्र मोदी सद्भावना उपवास पर बैठे थे। तब भी उपवास खुलवाने के लिए भय्यू महाराज को आमंत्रित किया गया था।
इससे पहले वो चर्चा में तब आए जब अन्ना हजारे के अनशन को खत्म करवाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने अपना दूत बनाकर भेजा था। बाद में अन्ना हजारे ने उनके हाथ से जूस पीकर अनशन तोड़ा था। पीएम बनने के पहले गुजरात के सीएम के रूप में नरेंद्र मोदी सद्भावना उपवास पर बैठे थे। तब भी उपवास खुलवाने के लिए भय्यू महाराज को आमंत्रित किया गया था।
भय्यू महाराज आश्रम में आ चुके हैं देश के तमाम दिग्गज
पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पीएम मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत, सचिन तेंदुलकर, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के पूर्व सीएम विलासराव देखमुख, शरद पवार, लता मंगेशकर, उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, आशा भोंसले, अनुराधा पौडवाल, फिल्म एक्टर मिलिंद गुणाजी भी उनके आश्रम आ चुके हैं।
पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पीएम मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत, सचिन तेंदुलकर, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के पूर्व सीएम विलासराव देखमुख, शरद पवार, लता मंगेशकर, उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, आशा भोंसले, अनुराधा पौडवाल, फिल्म एक्टर मिलिंद गुणाजी भी उनके आश्रम आ चुके हैं।
लेख और कविताएं भी लिखते थे भय्यू महाराज
संत भय्यू महाराज प्रवचन देते थे इसके साथ ही लेख और कविताएं भी लिखते थे। गाने और भजन गाते थे। वो स्कॉलरशिप बांटते हैं, कैदियों के बच्चों को पढ़ाते थे। किसानों को खाद-बीज मुफ्त बांटते थे। गांवों में तालाब खुदवाने और पौधारोपण का काम भी करवाते थे।
Source: Bhaskarhindi.com
संत भय्यू महाराज प्रवचन देते थे इसके साथ ही लेख और कविताएं भी लिखते थे। गाने और भजन गाते थे। वो स्कॉलरशिप बांटते हैं, कैदियों के बच्चों को पढ़ाते थे। किसानों को खाद-बीज मुफ्त बांटते थे। गांवों में तालाब खुदवाने और पौधारोपण का काम भी करवाते थे।
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