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ग्रीन बूट्स यानी वो भारतीय जो वापस नहीं आया


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सेवांग पालीजोर एक भारतीय पर्वतारोही थे जिनकी बॉडी माउंट एवरेस्ट पर ग्रीन बूट्स के नाम से जानी जाती है। सेवांग एवरेस्ट फतेह करने निकले एक भारतीय दल के सदस्य थे। माउंट एवरेस्ट से उतरते वक्त एक बर्फीले तूफान की चपेट में आने की वजह से उनकी मृत्यु हो गई थी। पिछले 22 सालों से सेवांग की डेड बॉडी एवरेस्ट पर है। यहां से गुजरने वाले पर्वतारोहियों के लिए ये बॉडी एक निशान बन चुकी है। माउंट एवरेस्ट की एक श्रृंखला में उत्तर फेस की ओर जाने के लिए ग्रीन बूट्स का एक निशान के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल सेवांग ने एवरेस्ट की चढ़ाई के वक्त हरे रंग के बूट पहने हुए थे, इसी वजह से उनकी बॉडी का नाम ग्रीन बूट्स पड़ा।

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ऐसे पड़ी पर्वतारोहियों की नजर
सबसे पहले सेवांग की बॉडी का वीडियो फ्रांस के पर्वतारोही पीएररे पपेरोंन ने 21 मई 2001 को बनाया था। कुछ साल बाद 2014 में ग्रीन बूट्स गायब हो गए। ऐसा कहा जा रहा था कि शायद वो इस बर्फीले पहाड़ में दफन हो चुके हैं या उनकी बॉडी को हटा दिया गया है। लेकिन 2017 में फिर से सेवांग की बॉडी को देखा गया।  

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एवरेस्ट की सबसे चर्चित डेड बॉडी    
एवरेस्ट की चढ़ाई करते हुए कम से कम 280 लोगों की मौत हो चुकी है। इस ऊंचाई से इन डेड बॉडीज को नीचे ले जाना लगभग नामुमकिन है इसलिए इन्हें यहीं छोड़ दिया गया। इन सभी 280 लाशों में 'ग्रीन बूट्स' को सबसे ज्यादा पहचान मिली है। इसके अलावा भी कई और पर्वतारोहियों की लाशें यहां मौजूद हैं जिन्हें एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाले एक चिन्ह के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इनमें भी फ्रांसिस अर्सेनटीएव की डेड बॉडी खास मानी जाती है। फ्रांसिस अमेरिका की पहली महिला थी जो साल 1999 में एवरेस्ट के शिखर पर बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के पहुंची थी लेकिन उतरते वक्त उनकी मौत हो गई। उनकी बॉडी को लोग 'स्लीपिंग ब्यूटी' के नाम से भी जानते हैं।   

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पर्वतारोही 'ग्रीन बूट्स' के पास करते हैं आराम 
मशहूर पर्वतारोही नोएल हैना के मुताबिक उत्तर की ओर से शिखर की तरफ जाने वाले 80 फीसदी पर्वतारोही बर्फीली हवाओं से बचने के लिए और कुछ देर 'ग्रीन बूट्स' के पास आराम करते हैं। इन पर्वतारोहियों का कहना है कि 'ग्रीन बूट्स' के पास रुकना बहुत ही मुश्किल है क्योंकि आपको उस चट्टान के नीचे दूर-दूर तक कोई इंसान नहीं दिखाई देगा। 

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वो पर्वतारोही जिसने 'ग्रीन बूट्स' के पास दम तोड़ा 
साल 2006 में पर्वतारोही डेविड शार्प की मौत एक बहुत बड़ा बहस का मुद्दा बनी हुई थी। डेविड शार्प बिना ऑक्सीजन सिलिंडर के ही माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने निकले थे। कहा जाता है कि उतरते वक्त वो 'ग्रीन बूट्स' के पास थोड़ी देर आराम करने के लिए रुके और इसी बीच उन्होंने बैठे-बैठे दम तोड़ दिया। चढ़ाई करते वक्त कई लोगों ने डेविड को मरते हुए देखा था लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की। 

Source: Bhaskarhindi.com

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