पढ़ने-लिखने की उम्र में मजदूरी करने के लिए मजबूर है भारत के एक करोड़ बच्चे !

बचपन जिंदगी का सबसे अनमोल पल होता है, सब लोग इसे बहुत ही बेहतर तरीके से जीते है, लेकिन इस दुनिया में वैसे भी कुछ लोग होते हैं, जिन्हें अपना बचपन भी नसीब नहीं होता है। उनकी मजबूरी उनके बचपन पर हावी हो जाती है और वे बच्चे मजदूरी करने पर विवश हो जाते है। अगर हम भारत की बात करें तो पाएंगे कि बाल मजदूरी हमारे देश की बहुत पुरानी एवं सबसे बड़ी समस्या रही है। पढ़ने और खेलने कूदने की उम्र में दुनिया के लगभग 152 मिलियन बच्चों में से 50 प्रतिशत बच्चे बाल श्रम में लगे हुए हैं। परिवार की जिम्मेदारी के बोझ तले ये बच्चे, अपने परिवार को पालने के लिए फेक्ट्री, कारखानों में काम करने लगते हैं।
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