ज्येष्ठ माह कल से होगा शुरू , इन कार्यों से मिलेगी वरुण और सूर्य देव की कृपा

हिन्दू कैलेंडर में ज्येष्ठ का महीना तीसरा महीना होता है जो इस बार 19 मई यानी शनिवार से शुरू होगा और 17 जून तक रहेगा। इस महीने में सूर्य अत्यंत ताकतवर होता है, इसलिए गर्मी भी भयंकर होती है। सूर्य की ज्येष्ठता के कारण इस माह को ज्येष्ठ कहा जाता है। चूंकि ज्येष्ठ का महीना वैशाख के महीने के बाद आता है। अंग्रेजी कैलेंडर की बात करें तो ये महीना हमेशा जून और मई के महीने में ही आता है। ऐसे में माना जाता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होता है। इसलिए भी इस महीने को ज्येष्ठ नाम दिया गया है।
करें ये कार्य
इस महीने में धर्म का सम्बन्ध जल से जोड़ा गया है, ताकि जल का संरक्षण किया जा सके। इस मास में सूर्य और वरुण देव की उपासना विशेष फलदायी होती है। इस माह में कुछ आसान उपायों से जल (वरुण) देव और सूर्य की कृपा पाई जा सकती है। इस माह में नित्य प्रातः और संभव हो तो सायं भी पौधों में जल दें। इस माह में गर्मी काफी तेज होती है और जल संकट भी, ऐसे में प्यासों को पानी पिलाएं, लोगों को जल पिलाने की व्यवस्था करें। इस माह में जल की बर्बादी न करें, घड़े सहित जल और पंखों का दान करें। नित्य प्रातः और सायं सूर्य मंत्र का जाप करें और यदि सूर्य सम्बन्धी समस्या है तो ज्येष्ठ के हर रविवार को उपवास रखें।
आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें - https://www.bhaskarhindi.com/news/jyeshtha-month-the-grace-of-sun-god-will-be-met-from-these-works-68208
इस महीने में धर्म का सम्बन्ध जल से जोड़ा गया है, ताकि जल का संरक्षण किया जा सके। इस मास में सूर्य और वरुण देव की उपासना विशेष फलदायी होती है। इस माह में कुछ आसान उपायों से जल (वरुण) देव और सूर्य की कृपा पाई जा सकती है। इस माह में नित्य प्रातः और संभव हो तो सायं भी पौधों में जल दें। इस माह में गर्मी काफी तेज होती है और जल संकट भी, ऐसे में प्यासों को पानी पिलाएं, लोगों को जल पिलाने की व्यवस्था करें। इस माह में जल की बर्बादी न करें, घड़े सहित जल और पंखों का दान करें। नित्य प्रातः और सायं सूर्य मंत्र का जाप करें और यदि सूर्य सम्बन्धी समस्या है तो ज्येष्ठ के हर रविवार को उपवास रखें।
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