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राज्यसभा में आज पेश होगा नागरिकता संशोधन बिल, उत्तर-पूर्वी राज्य कर रहे विरोध

राज्यसभा में आज पेश होगा नागरिकता संशोधन बिल, उत्तर-पूर्वी राज्य कर रहे विरोध

NEWS HIGHLIGHTS

  • लोकसभा में पास हो चुका है बिल
  • पूर्वात्तर के राज्य कर रहे विरोध
  • बिल पास होने पर 6 साल हो जाएगी नागरिकता की लिमिट

पिछले महीने 8 जनवरी को लोकसभा में पास हो चुका नागरिकता संसोधन बिल आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा। उत्तर पूर्वी राज्यों में इस बिल का भारी विरोध किया जा रहा है। बीजेपी की सरकार वाले पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने भी संशोधन बिल का विरोध किया है।

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। दोनों मुख्यमंत्रियों ने गृहमंत्री से राज्यसभा में बिल न पेश करने की गुजारिश की थी। राजनाथ सिंह ने दोनों मुख्यमंत्रियों को आश्वासन दिया था कि पूर्वोत्तर के मूल लोंगों के अधिकारों को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। 
नागरिकता संशोधन बिल
दरअसल केंद्र सरकार 1955 में आए नागरिकता कानून बिल में संशोधन करना चाहती है। इस कानून के अनुसार पहले बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देश से आए रिफ्यूजी को 12 साल देश में गुजारने के बाद नागरिकता मिलती है। हालांकि केंद्र सरकार इसको संशोधित कर इसके टाइम लिमिट को घटाना चाहती है। संशोधन के बाद 12 साल के बजाय 6 साल भारत में गुजारने पर नागरिकता मिल सकेगी। नॉर्थ-ईस्ट के लोग इसके खिलाफ हैं और इस बिल का विरोध कर रही हैं। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इस बिल का सबसे ज्यादा असर असम और मणिपुर समेत सभी पुर्वोत्तर राज्य पर पड़गा। लोगों का कहना है कि बांग्लादेशी लोगों के आने से असम और कई राज्यों के संस्कृति पर असर पड़ेगा।


Source: Bhaskarhindi.com

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