दमदार संवाद और डायलॉग के साथ एक्शन से भरपूर है फिल्म मणिकर्णिका

जबरदस्त डायलॉग
इस फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ एक्शन काफी शानदार है। एक्शन सीन में झांसी की रानी की वीरता को दर्शाती कंगना का किरदार दमदार नजर आता है। देशभक्ति के भरे फिल्म के संवाद और जबरदस्त डायलॉग फिल्म में जान डालने वाले हैं। जैसा कि जानते हैं कि फिल्म की कहानी झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के जीवन पर बेस्ड है, तो वीरता इसमें आपको साफ दिखाई देगी। दर्शकों ने अब तक अपनी फेवरेट क्वीन कंगना को फैशन का जलवा बिखेरने के साथ हंसाते रुलाते देखा था, लेकिन इस फिल्म में उनका जोश उनके फैन्स को एक नया अनुभव देने वाला है।
फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी मणिकर्णिका के जन्म से शुरू होती है। बचपन से ही मणिकर्णिका शस्त्र चलाने में महारत रखती हैं, इसी योग्यता को देखते हुए उनके लिए झांसी के राजा गंगाधर राव का रिश्ता आता है और उनकी शादी हो जाती है। शादी के बाद उनका नाम 'लक्ष्मीबाई' हो जाता है। बताते चलें कि फिल्म में रानी लक्ष्मी का किरदार कंगना और झांसी के राजा गंगाधर राव का किरदार जिस्सू सेनगुप्ता ने निभाया है। रानी लक्ष्मीबाई के जीवन में अब तक सब ठीक चलता है, लेकिन पति के निधन के बाद अंग्रेज झांसी को हड़पने की कोशिश करते हैं। इसके बाद वे अंग्रेजों से मुकाबला करने के लिए तैयार होती हैं... इस दौरान वे कैसे अंग्रेजों का मुकाबला करती हैं और कैसे युद्धभूमि में अपने दुश्मनों की ईंट से ईंट बजाती हैं, ये सब फिल्म में देखने को मिलेगा...
फिल्म देखने और न देखने की वजह
फिल्म लक्ष्मीबाई पर बनी है तो उनके सम्मान में आप इसे देख सकते हैं लेकिन कोई उम्मीद लेकर सिनेमाहॉल ना जाएं। ये फिल्म ना तो जोश दिलाती है और ना ही देशप्रेम जगा पाती है। हां, आप इसे कंगना की बेहतरीन अदाकारी के लिए भी देख सकते हैं। कंगना लक्ष्मीबाई के किरदार के साथ पूरा न्याय किया है। फिल्म में उनके किरदार को देखकर आप समझ जाएंगे कंगना इसके लिए कितनी मेहनत की है। ये फिल्म करीब तीन घंटे (2 घंटे 53 मिनट) की है। ना तो फिल्म की कहानी बांधकर रख पाती है और ना ही फ्लो ऐसा है कि लोग उसमें डूब जाएं। इतनी कमियों के बाद इस कदर लंबी फिल्म को देखना बहुत खलता है।
फिल्म की कहानी मणिकर्णिका के जन्म से शुरू होती है। बचपन से ही मणिकर्णिका शस्त्र चलाने में महारत रखती हैं, इसी योग्यता को देखते हुए उनके लिए झांसी के राजा गंगाधर राव का रिश्ता आता है और उनकी शादी हो जाती है। शादी के बाद उनका नाम 'लक्ष्मीबाई' हो जाता है। बताते चलें कि फिल्म में रानी लक्ष्मी का किरदार कंगना और झांसी के राजा गंगाधर राव का किरदार जिस्सू सेनगुप्ता ने निभाया है। रानी लक्ष्मीबाई के जीवन में अब तक सब ठीक चलता है, लेकिन पति के निधन के बाद अंग्रेज झांसी को हड़पने की कोशिश करते हैं। इसके बाद वे अंग्रेजों से मुकाबला करने के लिए तैयार होती हैं... इस दौरान वे कैसे अंग्रेजों का मुकाबला करती हैं और कैसे युद्धभूमि में अपने दुश्मनों की ईंट से ईंट बजाती हैं, ये सब फिल्म में देखने को मिलेगा...
फिल्म देखने और न देखने की वजह
फिल्म लक्ष्मीबाई पर बनी है तो उनके सम्मान में आप इसे देख सकते हैं लेकिन कोई उम्मीद लेकर सिनेमाहॉल ना जाएं। ये फिल्म ना तो जोश दिलाती है और ना ही देशप्रेम जगा पाती है। हां, आप इसे कंगना की बेहतरीन अदाकारी के लिए भी देख सकते हैं। कंगना लक्ष्मीबाई के किरदार के साथ पूरा न्याय किया है। फिल्म में उनके किरदार को देखकर आप समझ जाएंगे कंगना इसके लिए कितनी मेहनत की है। ये फिल्म करीब तीन घंटे (2 घंटे 53 मिनट) की है। ना तो फिल्म की कहानी बांधकर रख पाती है और ना ही फ्लो ऐसा है कि लोग उसमें डूब जाएं। इतनी कमियों के बाद इस कदर लंबी फिल्म को देखना बहुत खलता है।
विवाद:
बता दें कि रिलीज से पहले करणी सेना इस फिल्म को लेकर विरोध किया था। करणी सेना ने फिल्म में रानी लक्ष्मीबाई की इमेज को ठीक से पेश ना किए जाने का आरोप लगाया था। जबकि फिल्म में महारानी के किरदार को गलत तरीके से नहीं दिखाया गया। वहीं अंग्रेजी अफसर से प्रेम प्रसंग दिखाने जैसा कोई दृश्य भी फिल्म में नहीं है। फिल्म में लक्ष्मीबाई के किरदार को खूबसूरती के साथ दिखाया गया है। हालांकि फिल्म में सिंधिया राजघराने को इस फिल्म में सीधे तौर पर डरपोक दिखाया गया है। वहीं बस्ती में नाचने के एक दृश्य को दिखाया गया है। बांकि फिल्म में विवादस्पद दृश्य दिखाई नहीं देते।
Source: Bhaskarhindi.com
बता दें कि रिलीज से पहले करणी सेना इस फिल्म को लेकर विरोध किया था। करणी सेना ने फिल्म में रानी लक्ष्मीबाई की इमेज को ठीक से पेश ना किए जाने का आरोप लगाया था। जबकि फिल्म में महारानी के किरदार को गलत तरीके से नहीं दिखाया गया। वहीं अंग्रेजी अफसर से प्रेम प्रसंग दिखाने जैसा कोई दृश्य भी फिल्म में नहीं है। फिल्म में लक्ष्मीबाई के किरदार को खूबसूरती के साथ दिखाया गया है। हालांकि फिल्म में सिंधिया राजघराने को इस फिल्म में सीधे तौर पर डरपोक दिखाया गया है। वहीं बस्ती में नाचने के एक दृश्य को दिखाया गया है। बांकि फिल्म में विवादस्पद दृश्य दिखाई नहीं देते।
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