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आज लॉन्च होगा GSAT-7A, भारतीय वायुसेना को मिलेगी ताकत

ISRO: आज लॉन्च होगा GSAT-7A, भारतीय वायुसेना को मिलेगी ताकत

NEWS HIGHLIGHTS

  •  GSAT-7A उपग्रह की लॉन्चिंग
  •  GSAT-7A से भारतीय वायुसेना को मिलेगी ताकत
  •  GSAT-7A से पहले नौ सेना के लिए GSAT-7 उपग्रह लॉन्च किया गया था

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने अगले कम्यूनिकेशन सैटलाइट GSAT-7A को आज (बुधवार) को लॉन्च करने की तैयार कर रहा है। GSAT-7A को GSLV-F11 रॉकेट से बुधवार शाम 4.10 बजे श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड से लॉन्च किया जाएगा। वायुसेना के लिहाज से GSAT-7A की लॉन्चिंग बेहद अहम मानी जा रही है। GSAT-7A जैसे ही सैटलाइट जियो ऑरबिट में पहुंचेगा इस कम्यूनिकेशन सैटलाइट के जरिए भारतीय वायुसेना के सभी अलग-अलग ग्राउंड रेडार स्टेशन, एयरबेस और AWACS आपस में इंटरलिंक हो जाएंगे। इससे नेटवर्क आधारित वायुसेना की लड़ने की क्षमता में कई गुणा ज्यादा बढ़ोतरी होगी।

GSAT-7A से वायुसेना के एयरबेस इंटरलिंक होने का साथ ही ड्रोन ऑपरेशन में भी मदद मिलेगी। ड्रोन के जरिए होने वाले ज्यादातर ऑपरेशन में एयरफोर्स की ग्राउंड रेंज में खासा इजाफा होगा। बता दें कि इस समय भारत, अमेरिका में बने हुए प्रीडेटर-B या C गार्डियन ड्रोन्स को हासिल करने की कोशिश कर रहा है। ये ड्रोन्स अधिक ऊंचाई पर सैटलाइट कंट्रोल के जरिए काफी दूरी से दुश्मन पर हमला करने की क्षमता रखते हैं। GSAT-7A से पहले GSAT-7 सैटलाइट लॉन्च किया जा चुका है। इसे भारतीय वायुसेना के लिए तैयार किया गया था। यह सैटलाइट नेवी के युद्धक जहाजों, पनडुब्बियों और वायुयानों को संचार की सुविधाएं प्रदान करता है।
भारत के पास अभी करीब 13 मिलिट्री सैटलाइट्स हैं। इनमें से ज्यादातर सैटलाइट्स रिमोट-सेंसिंग सैटलाइट्स हैं जिनमें कार्टोसैट सीरीज और रीसैट सैटलाइट्स शामिल हैं। ये पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद रहते हैं और पृथ्वी के चित्र लेने में मददगार होते हैं। हालांकि कुछ सैटलाइट्स को पृथ्वी की भू-स्थैतिक कक्षा (जियो ऑरबिट) में भी स्थापित किया जाता है। इन सैटलाइट्स का इस्तेमाल निगरानी, नेविगेशन और कम्यूनिकेशन के लिए किया जाता है।


Source: Bhaskarhindi.com

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