बाल दिवस पर विशेष : जब बच्चे थे, थोड़े कच्चे थे पर अच्छे थे

NEWS HIGHLIGHTS
- देशभर में 14 नवंबर को मनाया जाता है बाल दिवस
- इसी दिन प्रथम प्रधानमंभी जवाहरलाल नेहरू का जन्म दिवस भी है
- चाचा नेहरू को बच्चे बहुत प्यारे थे, इसलिए इस दिन बाल दिवस मनाया जाता है
थोड़ी नादानी, थोड़ी मनमानी, थोड़ी शैतानी, थोड़ी खींचातानी, जब बच्चे थे, थोड़े कच्चे थे पर अच्छे थे। यह गीत आपने अक्सर सुना होगा और बचपन के उन दिनों को याद भी किया होगा। तो चलिए बाल दिवस पर हम भी आपको बचपन की कुछ यादें ताजा करवाते हैं...

बचपन में चिड़िया उड़ खेलना, साथियों में सबसे पहले किसकी उंगली उठेगी, इस पर टकटकी लगाना, कभी दोस्त को हराना, कभी खुद हार जाना। न किसी बात की चिन्ता, न कोई डर, गजब थे यारों वो दिन...

लो चल दिए भूल के सारे रूल, लईफ इज टू ब्यूटीफुल..सड़क पर नंगे पांव दौड़ लगाना, किसके आगे होगा कौन, जो जीता बस दोस्तों में वही बनेगा सिकंदर, अपनी ही धुन में रहना, जमकर मस्ती करना।

बचपन में आपको वो छुक-छुक ट्रेन में सफर करना तो याद ही होगा... वो भी दिन थे, जब छुक-छुक ट्रेन में हम मुंह से आवाज निकालकर सफर का मजा लिया करते थे... आज जब बच्चों को हम इस तरह की मस्ती करते देखते हैं, तो वो बचपन वाले दिन याद आ ही जाते हैं....

कंचे तो आपको याद ही होंगे, बचपन में कंचे जीतना कम रोचक नहीं था। लेकिन आज भी वर्चुअल दुनियां से अलग यह नजारा उन खेलों की याद दिला रहा है, जो शायद अब नई पीढ़ी की समझ से परे हैं। क्योंकि उनके हाथ में तो कीमती गैजेट्स आ गए हैं, शायद वो इन मजेदार खेलों से दूर हो चुके हैं।

इस आखिरी तस्वीर में बचपन का वो रंग है, जिसमें मिट्टी की सुगंध से सराबोर मनमौजी चेहरे नजर आ रहे हैं। बिन्दास और खिले हुए, कभी हम भी शायद ऐसे ही थे….जब बच्चे थे, थोड़े कच्चे थे पर अच्छे थे। वो भी दिन थे, जब हम रेत और मिट्टी में खेला करते थे... घर बनाया करते थे... रेत को ही ओढ़ लिया करते थे...
Source: Bhaskarhindi.com
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