सावन के दूसरे सोमवार में विशेष संयोग, हर मनोकामना होगी पूरी

डिजिटल डेस्क । सावन के दूसरे सोमवार पर विशेष संयोग है। इस दिन महाकाल शिव जी पूजा और उनकी सवारी के दर्शन करने से आपकी मनोकामना पूरी होगी। सावन के दूसरे सोमवार पर सुबह उज्जैन में ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर की पूरे विधि-विधान से पूजा की गई सुबह मंदिर के पट खुलने के बाद बाबा महाकाल को दूध-दही और पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके बाद बाबा महाकालेश्वर को भस्म रमाई गई सावन का दूसरा सोमवार होने के कारण देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह की आरती के लिए पहुंचे। पूरा मंदिर महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। रात 1 बजे से ही महाकाल मंदिर के बाहर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लग गई।
सुबह 3 बजे गर्भगृह के मंदिर के पट खोले गए और महाकाल को जगाया गया। श्रद्धालुओं ने महाकाल को दूध,जल चढ़ाया गया उसके पश्चात पूर्ण विधि-विधान से महाकाल की आरती फिर तत्पश्चात भस्म आरती हुई। फिर सुबह 4 बजे बाबा का श्रृंगार किया गया और फिर श्रृंगार आरती भी हुई। भस्म आरती में सम्मलित होने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। वहीं शाम को बाबा महाकाल की दूसरी सवारी भी भक्तों को दर्शन देने के लिए उज्जैन भ्रमण पर निकलेगी महाकाल बाबा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। शास्त्रों के अनुसार महाकाल शिवजी को ये माह अधिक प्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि महाकाल इस माह में पाताल लोक चले जाते हैं। त्रिकालदर्शी महाकाल शिव सभी देवों में सर्वशक्तिशाली और सरल-दयावान स्वभाव के स्वामी माने गए हैं। इसकी पहचान उनकी साधारण वेशभूषा से भी हो जाती है।

1/3क्या है शुभ संयोग
इस दिन शुभ संयोग बन रहा है। इस संयोग में पूजा करने से भगवान हर मनोकामना पूरी करते हैं। पुराणों के अनुसार, अन्य दिनों की अपेक्षा सावन में इस संयोग में शिव की सच्चे मन से पूजा करने पर कई गुना लाभ मिलता है। शिव के रूद्र रूप को उग्र माना जाता है, लेकिन प्रसन्न होने पर ये तीनों लोकों के सुखों को भक्तों के लिए सुलभ कर देते हैं। सावन के महीने में रूद्र ही सृष्टि के संचालन का कार्य देखते हैं। सावन का दूसरा सोमवार शिवभक्तों के लिए अच्छे स्वास्थ्य और बल प्रदान करने वाला माना गया है। सावन के इस सोमवार में शिव को भांग, धतूरा और शहद अर्पित करना उत्तम फलदाई रहेगा। कालसर्प योग की शांति के लिए भी दूसरा सोमवार बेहद शुभ है। शिव का रुद्राभिषेक से विशेष लाभ और शिव की कृपा प्राप्त होती है और कालसर्प योग भी दूर होता है। शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर सावन के महीने में ही उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया था। साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि जो भी भक्त सावन में मेरी पूजा करेगा उनकी सभी मनोकामनाएं मैं पूरी करूंगा।

2/3विनम्रता और तीव्र बुद्धि की मिलता है आशीर्वाद
आज के दिन कृतिका नक्षत्र है वैदिक ज्योतिष के अनुसार, भगवान शिव के पुत्र श्री कार्तिकय को कृतिका नक्षत्र का देवता माना जाता है। इस नक्षत्र पर कार्तिकेय का भी प्रबल प्रभाव रहता है। इस नक्षत्र में भगवान शिव की पूजा करने से विनम्रता, तीव्र बुद्धि तथा अन्य कई विशेषताएं आशीर्वाद के रूप में शिवभक्त को प्राप्त होती हैं। सावन का दूसरे सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग बना है इसके साथ ही वृद्धि योग और कृतिका नक्षत्र का संयोग बना है। जब कभी भी सावन सोमवार में इस तरह का योग बनता है तब इस मुहूर्त में शुक्र अस्त, पंचक, भद्रा आदि पर विचार करने की आवश्यकता नहीं होती है। सच्चे मन से पूजा,प्रार्थना करने पर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है।

3/3नकारात्मक ऊर्जा होती है दूर
वैसे तो सर्वार्थ सिद्धि योग अपने आप में भी सिद्ध मुहूर्त होते है। इस मुहूर्त में पूजा करने से नीच ग्रहों का प्रभाव नहीं रहता है। इसके अतिरिक्त कुयोग को समाप्त करने की शक्ति भी इस मुहूर्त में होती है। इस योग में आप गृह प्रवेश, मकान खरीदना, उद्घाटन करना, वाहन खरीदना आदि सभी कार्यों को आप बेहिचक इस मुहूर्त में कर सकते है। सावन के सोमवार के दिन वृद्धि योग बहुत ही शुभ माना गया है। इस योग में शिव की पूजा करने से सभी कार्य पूरे होते हैं। इस योग में भगवान शिव की भक्ति करने से आपके आसपास कभी नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है।
शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव को सभी अस्त्रों को चलाने में सिद्धि प्राप्त है। मगर धनुष और त्रिशूल उन्हें सबसे प्रिय हैं। त्रिशूल को रज, तम और सत गुण का प्रतीक भी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इन्हीं से मिलकर भगवान शिवजी का त्रिशूल बना है। महाकाल शिव के त्रिशूल के आगे सृष्टि की किसी भी शक्ति का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता है। यह दैविक और भौतिक विनाश का भी द्योतक है। हमारे पुराणों के अनुसार, भगवान शिव के गले में लटके नाग, नागलोक के राजा वासुकी हैं। ऐसा कहा जाता है कि वासुकी महादेव शिव के परमभक्त थे, जिनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें आभूषण स्वरूप में हमेशा अपने निकट रहने का वरदान दिया था। इस कारण से संपूर्ण नागलोक शिव के उपासक माने गए हैं।
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