जम्मू-कश्मीर में मेहबूबा और बीजेपी का गठबंधन टूटा, भाजपा ने समर्थन वापस लिया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। पार्टी के महासचिव राम माधव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आज हमने दिल्ली में सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ जम्मू-कश्मीर मुद्दे को लेकर एक अहम बैठक बुलाई थी। इसमें यह निर्णय लिया है कि अब कश्मीर में पीडीपी के साथ आगे चलना संभव नहीं होगा, इसलिए बीजेपी अपना समर्थन वापस ले रही है। भाजपा ने वहां राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है।
राज्यपाल को चिट्ठी भेजी
पीडीपी से गठबंधन तोड़ने के ऐलान के साथ ही बीजेपी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शाषण लगाया जाए। पीडीपी से नाता तोड़े जाने के फैसले से संबंधित चिट्ठी बीजेपी ने राज्यपाल एनएन वोहरा को भेज दी है। इस बीच राज्य में मुख्य विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस ने बैठक बुलाई है। इस बैठक में आगे की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी।
राज्यपाल को चिट्ठी भेजी
पीडीपी से गठबंधन तोड़ने के ऐलान के साथ ही बीजेपी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शाषण लगाया जाए। पीडीपी से नाता तोड़े जाने के फैसले से संबंधित चिट्ठी बीजेपी ने राज्यपाल एनएन वोहरा को भेज दी है। इस बीच राज्य में मुख्य विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस ने बैठक बुलाई है। इस बैठक में आगे की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी।
राम माधव ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की सहमति के बाद गठबंधन तोड़ने पर फैसला किया गया। कश्मीर में आज जो भी हालात हैं, उसके लिए महबूबा मुफ्ती ही जिम्मेदार हैं।' राम माधव ने आरोप लगाते हुए कहा, राज्य में आतंकवाद, हिंसा और कट्टरता लगातार बढ़ रही है। यहां घाटी में आम नागरिकों के मौलिक अधिकार खतरे में है।
गठबंधन टूटने पर शिवसेना ने कसा तंज
जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी के बीच गठबंधन टूटने के बाद शिवसेना ने भी तंज कसा है। उसने कहा कि ये एक अपवित्र गठबंधन था, जो हमने पहले ही कह दिया था कि यह ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा। यह एंटी नेशनल गठबंधन था।
पीडीपी के पास 28 और बीजेपी के पास 25 सीटें हैं
बता दें कि बीजेपी और पीडीपी में सीजफायर, कठुआ गैंगरेप मामले की जांच, सरकार में भागीदारी को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। 87 सदस्यों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीडीपी की 28, बीजेपी की 25 सीटें हैं। दोनों दलों ने चुनाव के बाद गठबंधन किया था।
गौरतलब है कि इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर दिल्ली में यह अहम बैठक बुलाई थी। शाह ने अपनी इस बैठक में जम्मू सरकार के सभी मंत्रियों और शीर्षक्रम के नेताओं को बुलाया था। बैठक से ठीक पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी अमित शाह से मिलने उनके निवास पर पहुंचे थे। कश्मीर में पिछले कुछ समय से फैल रहे तनाव को लेकर गृहमंत्रालय ने सेना को आक्रामक रवैया अपनाने के लिए कहा।
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