LIVE : राज्यपाल के फैसले पर निगाहें, JDS ने लगाया 100-100 करोड़ रुपए ऑफर करने का आरोप

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। कर्नाटक चुनाव के नतीजे आ गए हैं। राज्य विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। 104 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन वह बहुमत के जादुई आंकड़े से 8 सीट दूर है। इस बीच सरकार बनाने के लिए राज्य में 'हॉर्स ट्रेडिंग' शुरू हो गई है। कांग्रेस के एक विधायक अमरगौड़ा लिंगागौड़ा पाटिल ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने उससे समर्थन देने पर मंत्री पद और अन्य लाभ देने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन कुमारस्वामी ही उनके सीएम हैं। वहीं बुधवार सुबह कांग्रेस और जेडीएस ने विधायक दल की बैठक बुलाई। बीजेपी की बैठक में येदियुरप्पा को विधायक दल का नेता चुना गया। नेता चुने जाने के बाद येदियुरप्पा राज्यपाल से मिलने पहुंचे। जहां उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया। कांग्रेस और जेडीएस बुधवार शाम को राज्यपाल से मुलाकात करेगी।
सिद्धारमैया के ट्वीट ने बढ़ाई सरगर्मी
5 साल तक कर्नाटक के सीएम रहे सिद्धारमैया ने ट्वीट कर कर्नाटक की जनता का शुक्रिया किया। साथ ही दावा कि हम एक बार फिर सरकार बनाने जा रहे हैं। सिद्धारमैया ने दोपहर 3 बजे के करीब ये ट्वीट किया।
'बीजेपी हमारे विधायकों को दे रही 100-100 करोड़ का ऑफर'
कांग्रेस और जेडीएस के सीएम उम्मीदवार कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी उनके विधायकों को 100-100 करोड़ रुपए ऑफर कर रही है। कुमारस्वामी ने कहा कि बीजेपी की अश्वमेध यात्रा उत्तर भारत से शुरू हुई, जिसे कर्नाटक में रोक दिया गया है।
100 करोड़ के ऑफर को बीजेपी ने बताया आधारहीन
JDS विधायक दल की बैठक से गायब 2 MLA
बता दें कि जेडी (एस) के विधायक राजा वेंकटप्पा नायक और वेंकट राव नादागौड़ा जेडी (एस) विधायक दल की बैठक से गायब रहे।
राज्यपाल से मिलकर लौटे येदियुरप्पा
येदियुरप्पा ने मीडिया से कहा कि उन्होंने कहा मुझे उम्मीद है कि राज्यपाल सरकार बनाने के लिए न्योता देंगे। राज्यपाल ने भरोसा दिलाया है कि वो सही निर्णय लेंगे।
आपको बता दें कांग्रेस ने जनता दल (सेक्युलर) को समर्थन देने का प्रस्ताव किया है। दोनों की मिला कर 116 सीटें हैं, जो बहुमत से 4 ज्यादा हैं। चूंकि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, इस लिए उम्मीद है कि राज्यपाल सबसे पहले भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे।
राज्यपाल BJP/RSS से अपने पुराने रिश्ते भूलें : कांग्रेस
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के पास संख्याबल नहीं है। बीजेपी के पास 104 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस और JDS के पास 117 विधायकों का समर्थन है।राज्यपाल की ओर इशारा करते हुए आजाद ने कहा कि क्या जो व्यक्ति संविधान की हिफाजत के लिए है, वो इसे नुकसान भी पहुंचा सकता है? राज्यपाल को BJP/RSS से अपने पुराने रिश्ते को भूलकर काम करना होगा।
बैंगलुरू पहुंचे बीजेपी पर्यवेक्षक
बुधवार सुबह बीजेपी के पर्यवेक्षक के तौर पर प्रकाश जावड़ेकर, जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान बैंगलुरू पहुंचे।
राज्यपाल के पाले में है गेंद
जेडीएस कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा कर रही है। 78 सीटों के साथ कांग्रेस दूसरे नंबर की पार्टी बनी है। जेडीएस को सिर्फ 38 सीटें मिली हैं। कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन देने का प्रस्ताव किया है। दोनो दलों की सीटों मिलाने पर उनके खाते में 116 सीटें हो जाती हैं, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त हैं। अब गेंद राज्यपाल के पाले में है। देखना यह है कि राज्यपाल क्या निर्णय लेते हैं। वह सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। अब यह राज्यपाल के ऊपर है कि वह सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं या नहीं। पिछले कुछ समय में तीन राज्यों गोवा, मणिपुर और मेघालय के राज्य विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया।
सरकार बनाने के लिए बीजेपी का दावा सबसे पहले
बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी बीएस येदियुरप्पा ने कहा बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, इस लिए सबसे पहले उसे सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे पास सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत है। दूसरी ओर राज्यपाल से मिल कर सरकार बनाने का दावा करने पेश करने के बाद सिद्धारमैया ने कहा कि कांग्रेस ने बिना शर्त जेडीएस को समर्थन दिया है। गठबंधन की शर्तों पर बाद में निर्णय किया जाएगा। पहली प्राथमिकता सरकार गठन की है। उन्होंने कहा कि दोनों दल मिल कर बहुमत का जादुई आंकड़े से ऊपर जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें दो निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल है। अगर कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सत्ता में आता है, तो जेडीएस के एचडी कुमार कर्नाटक के सीएम बनेंगे।
कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन में सीएम बनेंगे कुमार स्वामी
बता दें कि अगर कांग्रेस और जेडीएस का गठबंधन का दावा चल गया तो जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के सीएम बन सकते हैं। कुमार स्वामी सन 2006 से 2007 तक कर्नाटक के सीएम रह चुके हैं। कुमार स्वामी रामानगरम से तीन बार विधायक रह चुके हैं। रामानगरम सीट कुमारस्वामी का गढ़ मानी जाती है। सन 2013 में कुमारस्वामी रामानगरम से 40 हजार वोटों से जीते थे। कुमारस्वामी दो बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। कुमार स्वामी ने कहा ऐसा कोई नियम नहीं है कि सबसे बड़ी पार्टी को ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए। हमारी पार्टी ने कभी सरकार बनाने के लिए बीजेपी से बातचीत नहीं की थी।
बीजेपी को मौका देने से मिलेगा अनैतिकता को बढ़ावा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने कहा कि राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी के दबाव में नहीं आते हुए सीधे कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए। दोनों के पास मिल कर सरकार बनाने के लिए जरूरी सदस्य संख्या है। राज्यपाल को उस समूह को चुनना चाहिए, जिसने जरूरी संख्याबल हासिल कर लिया है। बीजेपी के पास सीमित 104 सीटें है, जो निर्धारित संख्या बल से 8 कम हैं। सभी जानते हैं कि ईमानदारी से उसे किसी का समर्थन नहीं मिल सकता। वह सिर्फ शिकार करके ही जरूरी संख्या बल हासिल कर सकती है। राज्यपाल उसे इसका मौका देकर अनैतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का ही काम करेंगे। इस तरह हार्स ट्रेडिंग शुरू हो जाएगी।
एक्शन में आए रेड्डी बंधु
कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में अब खनन घोटाले के आरोपी रेड्डी बंधु भी एक्शन में आ गए हैं। खबर है कि बीजेपी हाईकमान ने उन्हें विपक्षी विधायकों को साधने का जिम्मा सौंपा है, ताकि विधानसभा में शक्ति परीक्षण के समय जरूरी समर्थन जुटा सकें। सूत्रों के अनुसार बीजेपी इस समय दस असंतुष्ट विधायकों के संपर्क में है। इनमें से 6 कांग्रेस के हैं, जबकि 4 जेडीएस के हैं। खबर है कि इस बीच एक निर्दलीय विधायक ने बीजेपी को समर्थन दे दिया है। येदियुरप्पा जिस आत्मविश्वास से सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं उससे भी इस बात की पुष्टि होती है कि समर्थन को लेकर वह निश्चिंत हैं।
मोदी के खासमखास माने जाते हैं राज्यपाल
कर्नाटक में सरकार बनाने के इंतजार में बैठी बीजेपी और कांग्रेस+जनता दल (सेक्युलर) राज्यपाल वजुभाई के फैसले का इंतजार कर रही हैं। राज्यपाल वजुभाई आर वाला के बारे में जानने की कोशिश करें तो पता चलता है कि वह नरेंद्र मोदी के सबसे वफादार लोगों में से एक रहे हैं। गुजरात सरकार में वित्त मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रहे वजुभाई ने नरेंद्र मोदी को विधानसभा पहुंचाने के लिए खुद की सीट भी छोड़ दी थी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपनी 'वफादारी' साबित करते हैं या फिर दूसरे पक्ष को मौका देते हैं। 2014 में कर्नाटक का राज्यपाल बनने से पहले वजुभाई लगातार 7 चुनाव जीत चुके थे और 18 बार गुजरात सरकार का बजट पेश किया था। आरएसएस के साथ 57 वर्षों तक जुड़े रहने वाले वजुभाई जनसंघ के संस्थापकों में से एक हैं। इमर्जेंसी के दौरान वह 11 महीने तक जेल में रहे। अब देखना दिलचस्प होगा कि वजुभाई यहां कैसा निर्णय लेते हैं। उनके सामने धर्मसंकट की स्थिति पैदा हो गई है।
Source: Bhaskarhindi.com
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