आज AMU में राष्ट्रपति कोविंद, दौरे को लेकर हो रहा था विरोध

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बुधवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के 65वें दीक्षांत कार्यक्रम (कॉन्वोकेशन सेरेमनी) में शामिल होंगे। राष्ट्रपति कोविंद का ये दौरा उनके विरोध की वजह से ज्यादा चर्चा में रहा। पिछले कई दिनों से AMU के स्टूडेंट्स राष्ट्रपति के आने का विरोध कर रहे हैं। इसी के मद्देनजर इस कार्यक्रम के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई है। बता दें कि इस कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति राजस्थान के गवर्नर कल्याण सिंह की पोती की शादी में भी शामिल होंगे।
5381 स्टूडेंट्स को देंगे डिग्री
5381 स्टूडेंट्स को देंगे डिग्री
जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बुधवार सुबह 11 बजे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) पहुंचेंगे। AMU के एथलेटिक्स ग्राउंड पर 11:30 बजे से दीक्षांत समारोह शुरू होगा, जो दोपहर 12:30 तक चलेगा। दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति AMU के 5381 स्टूडेंट्स को डिग्रियां देंगे। इनमें 2891 ग्रेजुएट स्टूडेंट्स, 2094 पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स, 25 MPhil और 371 PhD स्टूडेंट्स शामिल हैं।
AMU में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
AMU में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए AMU में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई है। बताया जा रहा है कि दीक्षांत समारोह में मोबाइल और कैमरा ले जाने पर भी बैन है। इसके साथ ही समारोह में एंट्री के लिए आईडी कार्ड भी रखा गया है। बताया जा रहा है कि सुरक्षा के नजरिए से किसी को भी कार्यक्रम स्थल पर किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाने पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही मीडियाकर्मियों के भी मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाने पर रोक है।
राष्ट्रपति के दौरे का हो चुका है विरोध
राष्ट्रपति के दौरे का हो चुका है विरोध
बता दें कि राष्ट्रपति के दौरे का विरोध AMU में पिछले कई दिनों से हो रहा है। AMU स्टूडेंट यूनियन के वाइस प्रेसिडेंट सजाद सुभान ने कहा था कि 'राष्ट्रपति 2010 में अपने दिए गए बयान के लिए या तो माफी मांगे या फिर दीक्षांत समारोह से दूर ही रहें।' इस पर AMUSU का ये भी कहना था कि 'वो राष्ट्रपति का नहीं बल्कि RSS का विरोध कर रहे हैं।'
राष्ट्रपति ने 2010 में क्या कहा था?
राष्ट्रपति ने 2010 में क्या कहा था?
दरअसल, 2010 में रंगनाथ मिश्रा कमीशन ने अपनी एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए 15% आरक्षण (10% मुस्लिम और 5% बाकी अल्पसंख्यक) की सिफारिश की गई थी। इस पर टिप्पणी करते हुए राष्ट्रपति ने कहा था कि 'ये हो ही नहीं सकता क्योंकि मुस्लिम और ईसाईयों को अनुसूचित जाति में शामिल करना गैर-संवैधानिक होगा।' उस वक्त बीजेपी के प्रवक्ता रहे रामनाथ कोविंद ने मुस्लिमों और ईसाईयों को विदेशी बताया था।
Source: Bhaskarhindi.com
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