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कुछ इस तरह थी नेताजी-एमिली की 'लव स्टोरी', यूं हुई थी पहली मुलाकात







डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 'मुझे नहीं पता, मेरा क्या होगा? लेकिन तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगी, मेरी सोच और मेरे सपनों में रहोगी। अगर हम इस जीवन में नहीं मिले तो अगले जीवन में मैं तुम्हारे साथ रहूंगा।' ये बात सुभाष चंद्र बोस ने उस महिला को लिखी थी, जिनसे वो बेइंतहा प्यार करते थे। नेताजी को अपने प्यार में गिरफ्तार करने वाली इस महिला का नाम एमिली शेंकल था। 1936 में एमिली को लिखे लेटर में नेताजी ने उन्हें 'क्वीन ऑफ माय हार्ट' यानी 'मेरे दिल की रानी' बताया था। आज नेताजी का जन्मदिन है और इस मौके पर हम आपको नेताजी और एमिली की वो लव स्टोरी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आप शायद ही जानते हों।

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एमिली से कुछ ऐसी हुई थी नेताजी की मुलाकात
ये 1934 का वक्त था। नेताजी ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में रहते थे। विएना में नेताजी अपना इलाज कराने गए थे और इसी दौरान एक यूरोपियन पब्लिशर ने नेताजी को 'द इंडियन स्ट्रगल' किताब लिखने को कहा। इसके लिए नेताजी को एक ऐसे सहयोगी की जरूरत महसूस हुई, जिसे इंग्लिश टायपिंग और इंग्लिश दोनों आती है। इसके लिए नेताजी को दो उम्मीदवार सुझाए गए। इनमें से एक उम्मीदवार को नेताजी रिजेक्ट कर चुके थे। दूसरा उम्मीदवार थीं, 23 साल की एमिली शेंकल। नेताजी ने एमिली का इंटरव्यू लिया और फिर नौकरी पर रख लिया। सुभाष चंद्र बोस की उम्र उस वक्त 37 साल थी और तब तक वो प्यार-मोहब्बत से दूर ही रहते थे। लेकिन एमिली के आने के बाद नेताजी की जिंदगी बदल गई और उन्हें खुद इस बात का पता नहीं चला कि वो कब एमिली के खूबसूरती और प्यार में उलझते चले गए।

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और फिर शुरू हुई नेताजी-एमिली की लव स्टोरी
26 जनवरी 1910 को ऑस्ट्रिया के एक कैथोलिक परिवार में जन्मीं एमिली शेंकल ने 1934 से नेताजी के साथ काम करना शुरू किया। एमिली ने सुगत बोस की किताब में लिखा है कि 'सुभाष चंद्र बोस ने ही प्यार की पहल की और फिर 1934 से लेकर 1936 तक हमारे रिश्ते रोमांटिक होते चले गए।' सुगत बोस नेताजी के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के पोते थे। सुगत बोस के मुताबिक, सुभाष चंद्र बोस को शादी के लिए कई ऑफर मिले, लेकिन नेताजी ने इनमें कोई दिलचस्पी नहीं ली, लेकिन एमिली की खूबसूरती में नेताजी पूरी तरह गिरफ्तार हो चुके थे।

माय डार्लिंग, तुम मेरे दिल की रानी हो..
5 मार्च 1936 को सुभाष चंद्र बोस ने एमिली को एक 'लव लेटर' लिखा। ये लव लेटर एमिली ने शरत चंद्र बोस के बेटे शिशिर कुमार बोस की पत्नी कृष्णा बोस को दिया था। अंग्रेजी में लिखे इस लेटर में नेताजी लिखते हैं 'माय डार्लिंग, समय आने पर तो बर्फिला पहाड़ भी पिघलता है, ऐसा ही भाव मेरे अंदर अभी है। मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं। ये बताने के लिए कुछ लिखने से खुद को रोक नहीं पा रहा हूं। माय डार्लिंग, तुम मेरे दिल की रानी हो, लेकिन क्या तुम मुझसे प्यार करती हो। मुझे नहीं पता कि भविष्य में मेरा क्या होगा? हो सकता है पूरा जीवन जेल में बिताना पड़े, मुझे गोली मार दी जाए या फिर फांस दे दी जाए। हो सकता है मैं तुम्हें कभी देख नहीं पाऊं, लेकिन भरोसा करो, तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगी। मेरी सोच और मेरे सपनों में रहोगी। अगर हम इस जीवन में नहीं मिले तो अगले जन्म में मैं तुम्हारे साथ रहूंगा।' आखिरी में नेताजी लिखते हैं 'मैं तुम्हारी आत्मा से प्यार करता हूं। तुम पहली औरत हो, जिससे मैंने प्यार किया।'

क्या है सुभाष चंद्र बोस की 'मौत का सच?'

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आखिरकार हो ही गई नेताजी-एमिली की शादी
लगातार लेटरों में अपने प्यार को जाहिर करने के बाद सुभाष चंद्र बोस और एमिली ने शादी कर ली। ये शादी बहुत ही गुप्त रखी गई थी और आज भी इस बारे में ज्यादा किसी को नहीं पता था। नेताजी-एमिली की शादी के बार में इतना ही पता है कि इन दोनों की शादी दिसंबर 1937 को ऑस्ट्रिया के बादगास्तीन में हुई थी। इस शादी में किसी को बुलाया भी नहीं गया था और ये शादी बहुत ही गोपनीय रखी गई। माना जाता है कि अपनी शादी को नेताजी ने गुप्त इसलिए रखा क्योंकि वो इसका असर अपने राजनीतिक करियर में नहीं पड़ने देना चाहते थे। एक विदेशी महिला से शादी करने से नेताजी की छवि को नुकसान पहुंच सकता था।

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सिर्फ 3 साल तक ही साथ रह पाए नेताजी-एमिली
नेताजी और एमिली की लव स्टोरी 1934 में शुरू हुई थी और दोनों का साथ 1934-1945 तक 12 साल का रहा। हालांकि, इस दौरान भी दोनों साथ में सिर्फ 3 साल ही रह पाए। 29 नवंबर 1942 को को एमिली ने एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम अनीता रखा गया। नेताजी अपनी बेटी को देखने के लिए दिसंबर 1942 में विएना पहुंचते हैं और अपने भाई शरत चंद्र बोस को अपनी पत्नी और बेटी की जानकारी देते हैं। इसके बाद सुभाष उस मिशन पर निकलते हैं, जहां से वो कभी लौटकर नहीं आए। 18 अगस्त 1945 को नेताजी की एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई। हालांकि अभी भी लोगों को नेताजी की मौत पर शक है और कई लोगों का मानना है कि नेताजी उस दुर्घटना में जिंदा बच गए थे। नेताजी की मौत के बाद एमिली अपनी बेटी अनीता के साथ 1996 तक जीवित रहीं। एमिली ने अकेले दम पर अनीता को पाल-पोसकर बड़ा किया और जर्मनी का मशहूर अर्थशास्त्री बनाया।

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